2 Inch Mahamrityunjay Narmadeshwar Shivling with 4 Inch Black Damru Jaladhari & Golden Naag
2 इंच महामृत्युंजय नर्मदेश्वर शिवलिंग, 4 इंच डमरू जलाधारी एवं स्वर्णिम नाग के साथ
महामृत्युंजय नर्मदेश्वर शिवलिंग का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में भगवान शिव को महादेव, भोलेनाथ, त्र्यंबकेश्वर और महामृत्युंजय सहित अनेक पवित्र नामों से जाना जाता है। भगवान शिव का महामृत्युंजय स्वरूप जीवन, आरोग्य, दीर्घायु, निर्भयता और आध्यात्मिक कल्याण की कामना से जुड़ा हुआ है।
मध्यप्रदेश की पवित्र माँ नर्मदा नदी से प्राप्त प्राकृतिक नर्मदेश्वर शिवलिंग का शिव आराधना में विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
हरिशंकर शिवलिंग आर्ट द्वारा प्रस्तुत यह 2 इंच का महामृत्युंजय नर्मदेश्वर शिवलिंग अपने आकर्षक लाल एवं हल्के सफेद-भूरे रंग के स्वरूप के कारण विशेष दिखाई देता है।
इस शिवलिंग का ऊपरी भाग लाल रंग का है, जिस पर सुंदर गोलाकार रेखाएँ दिखाई देती हैं, जबकि निचला भाग हल्के सफेद-भूरे रंग का है। इसकी अनोखी रंगीन बनावट इसे एक विशिष्ट नर्मदेश्वर शिवलिंग का स्वरूप प्रदान करती है।
इसके साथ 4 इंच की काले रंग की डमरू जलाधारी और सुंदर स्वर्णिम नाग दिया गया है, जो इस संपूर्ण पूजा सेट को पारंपरिक एवं आकर्षक बनाता है।
महामृत्युंजय नर्मदेश्वर शिवलिंग क्या होता है?
महामृत्युंजय भगवान शिव का एक अत्यंत पूजनीय स्वरूप है। महामृत्युंजय का अर्थ है मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाला।
भगवान शिव को त्र्यंबक अर्थात तीन नेत्रों वाले देवता के रूप में भी पूजा जाता है।
हिंदू धार्मिक परंपराओं में महामृत्युंजय मंत्र का विशेष महत्व है। यह मंत्र ऋग्वेद में वर्णित है और भगवान रुद्र की आराधना से संबंधित है।
महामृत्युंजय नर्मदेश्वर शिवलिंग के सामने श्रद्धापूर्वक पूजा, जलाभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना आध्यात्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान महामृत्युंजय की आराधना आरोग्य, दीर्घायु, भय से मुक्ति और परिवार के कल्याण की कामना से की जाती है।
महामृत्युंजय मंत्र और उसका महत्व
महामृत्युंजय मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
मंत्र का सरल अर्थ:
हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की आराधना करते हैं, जो संपूर्ण संसार का पालन-पोषण करने वाले हैं। जिस प्रकार पका हुआ फल अपने बंधन से अलग हो जाता है, उसी प्रकार भगवान शिव हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करके अमृतत्व की ओर ले जाएँ।
धार्मिक मान्यताओं में इस मंत्र का जाप मानसिक शांति, साहस, आध्यात्मिक शक्ति और जीवन के कल्याण की कामना से किया जाता है।
4 इंच डमरू जलाधारी का धार्मिक महत्व
इस महामृत्युंजय नर्मदेश्वर शिवलिंग के साथ 4 इंच की काले रंग की डमरू जलाधारी दी गई है।
डमरू जलाधारी की बनावट में ऊँचा गोलाकार आधार होता है, जो भगवान शिव के डमरू के आकार से मिलता-जुलता है।
शिवलिंग की जलाधारी को धार्मिक भाषा में पीठिका अथवा योनि पीठ भी कहा जाता है।
शिवलिंग को भगवान शिव तथा जलाधारी को माता शक्ति का प्रतीक माना जाता है। दोनों का संयुक्त स्वरूप शिव और शक्ति की एकता का संदेश देता है।
डमरू जलाधारी की विशेषताएँ:
शिवलिंग को सुंदर एवं स्थिर आधार प्रदान करती है।
शिवलिंग पर अर्पित जल एवं अभिषेक द्रव्यों को बाहर प्रवाहित करने में सहायता करती है।
इसका पारंपरिक डमरू आकार पूजा मंदिर की शोभा बढ़ाता है।
शिव और शक्ति की एकता का प्रतीक मानी जाती है।
घर के पूजा मंदिर एवं नियमित जलाभिषेक के लिए उपयुक्त है।
शिवलिंग के साथ नाग क्यों रखा जाता है?
भगवान शिव के गले में नागराज वासुकि विराजमान माने जाते हैं। नाग भगवान शिव के दिव्य स्वरूप का एक महत्वपूर्ण धार्मिक प्रतीक है।
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग शक्ति, सुरक्षा, निर्भयता और आत्मसंयम का प्रतीक है।
इस महामृत्युंजय नर्मदेश्वर शिवलिंग के साथ दिया गया स्वर्णिम नाग शिवलिंग के चारों ओर सुंदर रूप में स्थापित है।
नाग का धार्मिक महत्व:
सुरक्षा का प्रतीक: नाग को धार्मिक परंपराओं में रक्षा एवं सतर्कता का प्रतीक माना जाता है।
निर्भयता का संदेश: भगवान शिव के गले में नाग का होना भय पर विजय का प्रतीक माना जाता है।
आध्यात्मिक शक्ति: योग परंपरा में सर्प को कुंडलिनी शक्ति से भी जोड़ा जाता है।
शिवभक्ति का प्रतीक: नागराज वासुकि का भगवान शिव के साथ विशेष धार्मिक संबंध माना जाता है।
घर में महामृत्युंजय नर्मदेश्वर शिवलिंग रखने से क्या होता है?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में महामृत्युंजय स्वरूप के नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा करना शुभ माना जाता है।
1. आरोग्य और दीर्घायु की कामना: भगवान महामृत्युंजय की पूजा परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्रार्थना के लिए की जाती है।
2. भय से मुक्ति की भावना: महामृत्युंजय भगवान शिव का स्वरूप भक्तों को साहस, विश्वास और निर्भयता की प्रेरणा देता है।
3. मानसिक शांति: शिव पूजा, ध्यान एवं महामृत्युंजय मंत्र का जाप मन को शांत और एकाग्र करने में सहायक हो सकता है।
4. पारिवारिक सुख-शांति: भगवान शिव की नियमित आराधना घर में भक्तिमय वातावरण एवं पारिवारिक सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
5. आध्यात्मिक कल्याण: महामृत्युंजय शिवलिंग की पूजा भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना का माध्यम है।
महामृत्युंजय नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा कैसे करें?
शिवलिंग को घर के स्वच्छ एवं पवित्र पूजा स्थान पर डमरू जलाधारी के साथ स्थापित करें।
भगवान महामृत्युंजय शिव का ध्यान करें।
शिवलिंग पर स्वच्छ जल से अभिषेक करें।
अपनी पूजा परंपरा के अनुसार दूध अथवा पंचामृत अर्पित करें।
भगवान शिव को बेलपत्र, पुष्प एवं चंदन अर्पित करें।
श्रद्धापूर्वक महामृत्युंजय मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं।
भगवान शिव की आरती करके परिवार के स्वास्थ्य, सुख-शांति एवं कल्याण की प्रार्थना करें।
सोमवार, प्रदोष व्रत, सावन मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव की विशेष पूजा का धार्मिक महत्व माना जाता है।
Product Details – उत्पाद की जानकारी
Product Name: Mahamrityunjay Narmadeshwar Shivling Set
Shivling Height: 2 Inches
Jaladhari Size: 4 Inches
Shivling Type: Natural Mahamrityunjay Narmadeshwar Shivling
Shivling Colour: Natural Red & Light White-Brown
Jaladhari Type: Damru Jaladhari
Jaladhari Colour: Black
Naag: Golden Colour Decorative Naag
Suitable For: Home Temple, Daily Shiva Puja, Jalabhishek, Mahamrityunjay Mantra Jaap, Meditation & Religious Gifting
Brand: Harishankar Shivling Art
हरिशंकर शिवलिंग आर्ट से महामृत्युंजय नर्मदेश्वर शिवलिंग क्यों खरीदें?
Harishankar Shivling Art माँ नर्मदा से जुड़े प्राकृतिक नर्मदेश्वर शिवलिंग एवं भगवान शिव की पूजा से संबंधित पारंपरिक सामग्री के लिए समर्पित है।
हमारा उद्देश्य नर्मदेश्वर शिवलिंग की धार्मिक परंपरा एवं आध्यात्मिक महत्व को भारत सहित विश्वभर के शिवभक्तों तक पहुँचाना है।
यह 2 इंच का महामृत्युंजय नर्मदेश्वर शिवलिंग, 4 इंच की काले रंग की डमरू जलाधारी एवं स्वर्णिम नाग के साथ घरेलू पूजा, महामृत्युंजय मंत्र जाप, दैनिक शिव आराधना और धार्मिक उपहार के लिए एक सुंदर विकल्प है।
इसका आकर्षक लाल एवं हल्का सफेद-भूरा स्वरूप, प्राकृतिक रेखाएँ और पारंपरिक डमरू जलाधारी इसे शिवभक्तों के लिए एक विशेष पूजा संग्रह बनाते हैं।
हरिशंकर शिवलिंग आर्ट – माँ नर्मदा की पवित्र धरा से आपके पूजा मंदिर तक।







